Posts

Showing posts from May, 2020

एक प्याली चाय!

Image
फँसे हैं इस कदर मुश्किल में के घर में ही कैद हो गये, टेहेलने को ठिकाने थे कई सारे पल भर में सारे के सारे बंद हो गये  । घुमा करते थे कभी शहर-शहर, घुमे कभी कोना-कोना गली का, अब तो बस नापते हैं कोने सें कोना अपने ही घर का । अहमियत तो कई चिजो की हुआ करती थी जिंदगी में, अब तो दो वक्त की रोटी खाओ, और सारा समय बिताओ घर में । फ़िक्र तो अपनो की सदा करते हैं, मगर अब तो रहा ही नही जाता हैं, पुछ ही लेते हैं "तुम जहाँ हो ठीक तो हो?" तुम्हे कुछ ना हो, हम दुआ करते हैं। न जाने कब इससे आझादी मिलेगी, जीएंगे खुलकर, न कोई फ़िक्र होगी फिर वही दिन, वही दोस्त होंगे और बस एक चाय की प्याली होगी | - कस्तुरी दाणी